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स्वच्छता ही इसे रोकने का एकमात्र उपाय है।

गर्मी तेवर दिखा रही है। अब बारिश के साथ मलेरिया फैलने का समय भी करीब है। यह रोग प्लाजमोडियम समूह के  प्रोटोजोआ परजीवी से फैलता है। इसका वाहक मादा एनाफिलीज मच्छर होता है। स्वच्छता ही इसे रोकने का एकमात्र उपाय है।  मलेरिया, प्लाजमोडियम परजीवी की पांच प्रजातियों ;प्लाण् वाइवेक्सए प्लाण् फैल्सीपैरमए प्लाण् मलेरी प्लाण् ओवेल व प्लाण् नोलेसीद्ध से फैलता है।  इनमें सबसे खतरनाक वाइवेक्स और फैल्सीपैरम हैं जो फेफड़ों और किडनी को प्रभावित करने के अलावा रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा घटाकर जानलेवा तक हो सकते हैं।

तीन तरह का होता मलेरिया : कई अंगों को करता प्रभावित
 
सामान्य मलेरिया:- इसमें मच्छर के काटने के 10.21 दिनों में लक्षण दिखने लगते हैं। मरीज को अत्यधिक सर्दी लगनाए कंपकंपी सिरदर्द उल्टी बदनदर्द व तेज बुखार के साथ पसीना आता है। दवा देने पर 5.10 दिन में मरीज ठीक हो जाता है। लेकिन यदि परजीवी की वाइवेक्स या मलेरी प्रजाति शरीर में फैल रही है तो ठीक होने के बाद लक्षण दोबारा दिखने लगते हैं।
गंभीर मलेरिया:-  शरीर में परजीवी की संख्या बढऩे से लाल रक्त कणिकाओं की संख्या कम होने लगती है। इससे प्लेटलेट्स की संख्या 50 हजार से भी कम हो जाती है। कई बार विभिन्न अंग प्रभावित होते हैं। दिमाग पर असर होने से बेहोशीए कोमाए दौरे या न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर हो सकते हैं। किडनी को नुकसान होने से पेशाब न बन पाना और किडनी फेल होने से शरीर में गंदगी इकट्ठी होने लगती है। फेफड़ों में पानी भरने व इस अंग में संक्रमण की आशंका बढ़ती है जिसे पल्मोनरी एडीमा कहते हैं। सांस लेने में तकलीफ होती है और लिवर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने से लिवर एंजाइम्स नहीं बन पाते व पीलिया की शिकायत रहती है। मरीज को भर्ती कर बुखार उतारने के बाद रेडिकल केयर के रूप में 14 दिन तक प्राइमाक्यूनीन दवा देते हैं ताकि यह दोबारा न हो।